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हिंदू साधु संतों पर दोहरा मापदंड,आखिर क्यों?

by Admin
December 9, 2025
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हिंदू साधु संतों पर दोहरा मापदंड,आखिर क्यों?

साधु-संतों पर नागार्जुन: साधुओं को जगाने की जरूरत है

 

आज देश में एक खतरनाक प्रवृत्ति दिखाई दे रही है—

हिंदू साधु-संतों पर जरा सा भी आरोप लगाया गया है कि मीडिया, पुलिस और सक्रिय तंत्र सक्रिय हो गए हैं, मनो वे दोषी साबित हो गए हैं। बिना जांच, बिना प्रमाण, बिना सत्यापन-पहले अपवित्र, बाद में जांच।

 

लेकिन दूसरी ओर, जब किसी मौलवी या पादरी पर संगीन पर आरोप लगाया गया, तो यही सिस्टम अचानक मोन, संदेश और धीमा हो जाता है।

मीडिया खबर दबाती है, पुलिस हाथ से डरती है, और कई संस्थाएं तुरंत "सामुदायिक विद्यालय" का आधार लेकर अनाथालय की ढाल बन जाती हैं।

 

यह

 

क्यों?

 

क्योंकि हिंदू साधु-संत "नरम साधक" हैं उनका पिछला कोई संस्थागत दबाव समूह नहीं है। मीडिया को पता है कि हिंदू समाज व्यापक विरोध नहीं करना चाहता सिस्टम यह भी जानता है कि साधुओं पर कार्रवाई से कोई खतरा या प्रतिक्रिया नहीं होती है

इसके खतरे क्या हैं?

 

साधु-संतों की प्रतिष्ठा धूमिल होती है। समाज सत्य से भटकाता है और हिंदू संस्कृति पर प्रभाव रहता है। यह केवल लोगो का प्रश्न नहीं है - यह पूरी तरह से परंपरा और अध्यात्म पर प्रहार है।

हिंदू साधु-संतों पर बड़े पैमाने पर प्रभाव पड़ रहे हैं, ये अब छिपा नहीं है।

समय आ गया है कि हिंदू समाज सोचे—

 

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